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My Seven Year in Arab / अरब में मेरे सात साल

Rs. 70.00

समाज ऐसे लोगों से अत्याधिक प्रभावित होता है जो न केवल अपने देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते है । ऐसे ही बहुत से उपदेशक-प्रचारक हुए है जिन्होंने कष्टों की परवाह न करते हुए देश-विदेश में सनातन संस्कृति का प्रचार किया है । इसी प्रकार श्री रूचिराम जी अर्योपदेशक जी ने धर्म को जानकर विदेशों में भी इसका प्रचार प्रसार करने का निश्चय किया और उसे पूरा भी किया । अरब जैसे धर्मांध जैसे देश में उन्होंने अपने सात साल बिताये । विपरीत भौगालिक वातावरण, असुविधा और प्रतिदिन नित नई-नई समस्याओं का सामना करते हुए होने भारत भूमि के प्रचार का कार्य किया । जोकि इन पक्तियों से साफ़ हो जाता है कि:-

आयेंगे ख़त अरब से उनमें लिखा ये होगा ।

गुरुकुल का ब्रह्मचारी हलचल मचा रहा है ।।

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